सिंह अकेला बन रहे , पलक-पलक कर दौर। जैसा बन है आपना , तैसा बन है और॥

“The lion alone is roaming, from blink to blink. As is your nature, so is your being.”

— कबीर
अर्थ

शेर अकेला घूम रहा है, पलक-पलक कर चक्कर लगा रहा है। जैसा आपका स्वभाव है, वैसा ही आपका अस्तित्व है।

विस्तार

यह दोहा हमें अपनी पहचान और अकेलेपन के सफर पर गहराई से सोचने को कहता है। कबीर जी शेर के अकेले घूमने की छवि से समझाते हैं कि जीवन में हमें अपनी प्रकृति का सामना खुद ही करना पड़ता है। इसमें बाहरी सहारे की नहीं, बल्कि अपने भीतर की पहचान की बात है – जैसी आपकी प्रकृति है, वैसा ही आपका अस्तित्व भी है। यह खुद को जानने और स्वीकारने की एक प्यारी सी पुकार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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