यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी अच्छी कि इंसाँ आलम-ए-इंसानियत पर बार हो जाए

“If this indeed be life, then suicide is far more kind, / Than living as a burden on the realm of humankind.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

अगर ज़िंदगी यही है कि इंसान पूरी इंसानियत पर बोझ बन जाए, तो ऐसी ज़िंदगी से बेहतर ख़ुदकुशी है।

विस्तार

इस शेर में शायर ज़िंदगी की गरिमा और आत्मसम्मान की बहुत गहरी बात कह रहा है। यहाँ ख़ुदकुशी का ज़िक्र किसी कमज़ोरी की वजह से नहीं, बल्कि इस तकलीफ़देह ख़्याल से उभरा है कि इंसान दूसरों पर या पूरी इंसानियत पर एक बोझ बनकर न जिए। शायर का मानना है कि जीवन वही सार्थक है जो समाज को कुछ दे सके; अगर हमारा वजूद ही दूसरों के लिए भारी पड़ जाए, तो ऐसी बेमक़सद ज़िंदगी बेमानी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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