इसी काएनात में ऐ 'जिगर' कोई इंक़लाब उठेगा फिर — जिगर मुरादाबादी
“In this very universe, O Jigar, a revolution will rise once more; for even after rising so high, man remains a slave to his desires.”
अर्थ
ऐ जिगर, इसी दुनिया में फिर कोई क्रांति आएगी, क्योंकि इतनी ऊँचाइयों पर पहुँचने के बावजूद इंसान आज भी अपनी इच्छाओं का गुलाम है।
विस्तार
जिगर मुरादाबादी यहाँ इंसान की तरक़्क़ी और उसकी कमज़ोरी के बीच का गहरा विरोधाभास दिखा रहे हैं। हमने ज्ञान, विज्ञान और सोच के आसमान तो छू लिए, लेकिन आज भी हम अपनी तुच्छ लालसाओं और ख़्वाहिशों के क़ैदी बने हुए हैं। शायर का मानना है कि इस दुनिया में असली इंक़लाब अभी बाकी है—एक ऐसा बदलाव जो इंसान को बाहर से नहीं, बल्कि अपनी ही इच्छाओं की गुलामी से आज़ाद कराए।
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