जब इश्क़ अपने मरकज़-ए-असली पे आ गया — जिगर मुरादाबादी

जब इश्क़ अपने मरकज़-ए-असली पे आ गया ख़ुद बन गया हसीन दो आलम पे छा गया

“When love arrived at its true and primal core, it turned to beauty itself and held both realms in thrall.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

जब प्रेम अपने मूल केंद्र पर पहुँच गया, तो वह स्वयं सौंदर्य बन गया और दोनों जहानों पर छा गया।

विस्तार

इस शेर में शायर इश्क़ के उस मुक़ाम की बात कर रहे हैं जहाँ वह अपनी चरम ऊँचाइयों को छू लेता है। आम तौर पर इश्क़ हुस्न का तलबगार होता है, लेकिन जब वह अपनी असल हक़ीक़त यानी रूहानी केंद्र तक पहुँचता है, तो आशिक़ और माशूक़ का फ़र्क़ मिट जाता है और इश्क़ ख़ुद हुस्न बनकर दोनों जहानों पर छा जाता है। यह शेर इस गहरे सच को दर्शाता है कि सच्ची और पाकीज़ा मोहब्बत किसी की मोहताज नहीं रहती, बल्कि ख़ुद कायनात की सबसे ख़ूबसूरत सच्चाई बन जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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