ये निस्बत इश्क़ की बे-रंग लाए रह नहीं सकती — जिगर मुरादाबादी

ये निस्बत इश्क़ की बे-रंग लाए रह नहीं सकती जो महबूब-ए-ख़ुदा का है वो महबूब-ए-ख़ुदा होगा

“This bond of love cannot fail to reveal its vibrant hue; whoever belongs to God's Beloved shall be beloved of God too.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

इश्क़ का यह संबंध अपना असर और रंग दिखाए बिना नहीं रह सकता; जो ख़ुदा के महबूब का प्यारा है, वह निश्चित ही ख़ुदा का भी महबूब बन जाएगा।

विस्तार

यह शेर रूहानी मुहब्बत के उस गहरे असर की बात करता है जो कभी छुपाया नहीं जा सकता। 'रंग लाना' एक ख़ूबसूरत मुहावरा है, जिसका मतलब है कि इश्क़ का ताल्लुक़ इंसान के पूरे वजूद को अपनी चमक से निखार देता है। शायर का यक़ीन है कि जो पैग़ंबर-ए-ख़ुदा से दिल से जुड़ जाता है, वह बिला-शुबा ख़ुदा का भी चहेता बन जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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