हमें मालूम है हम से सुनो महशर में क्या होगा — जिगर मुरादाबादी
“We know it well, hear from us what Judgment Day will be: while all the world is gazing at Him, His eyes will look on me.”
अर्थ
हमें पता है, हमसे सुनो कि क़यामत के दिन क्या होगा; उस दिन सारी दुनिया उसे देख रही होगी और वह हमें देख रहा होगा।
विस्तार
प्रलय यानी महशर के उस मंज़र की कल्पना कीजिए, जहाँ सारी दुनिया अपने महबूब या खुदा की एक झलक पाने के लिए बेचैन खड़ी होगी। लेकिन शायर यहाँ बड़े लाड और नाज़ से कहता है कि उस बेपनाह भीड़ में जब सब उसे तक रहे होंगे, महबूब की नज़रें सिर्फ़ अपने आशिक़ को देख रही होंगी। यह शेर क़यामत की दहशत को भुलाकर इश्क के एक बेहद निजी, गहरे और बेबाक रिश्ते को सामने लाता है।
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