'जिगर' का हाथ होगा हश्र में और दामन-ए-हज़रत — जिगर मुरादाबादी
“On Judgment Day, Jigar's hand shall clasp the Prophet's hem; be it grievance or complaint, whatever is spoken will be declared in plain sight.”
अर्थ
प्रलय (हश्र) के दिन जिगर का हाथ हज़रत (पैग़ंबर) के दामन में होगा; चाहे कोई शिकायत हो या शिकवा, जो कुछ भी होगा वह सबके सामने खुलकर कहा जाएगा।
विस्तार
जिगर मुरादाबादी यहाँ क़यामत के उस ख़ौफ़नाक मंज़र को बेपनाह मोहब्बत और अक़ीदत से भर देते हैं। वे कहते हैं कि हश्र के दिन जब सब डर से काँप रहे होंगे, तब वे हुज़ूर के दामन को थामे खड़े होंगे—जो हिफ़ाज़त और शफ़ाअत का सबसे बड़ा सहारा है। इस शेर में एक आशिक़ का अनोखा नाज़ और भरोसा झलकता है, जहाँ दुनिया के सारे दुख और शिकायतें बिना किसी झिझक के अपने महबूब के सामने खुलेआम रखी जाएँगी।
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