अक़्ल ओ जुनूँ में सब की थीं राहें जुदा जुदा — जिगर मुरादाबादी

अक़्ल ओ जुनूँ में सब की थीं राहें जुदा जुदा हिर-फिर के लेकिन एक ही मंज़िल पे आ गए

“Though reason and passion set out on paths parted and wide, through every winding turn, at the very same destination they arrived.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

अक़्ल और जुनून के रास्ते सभी के लिए अलग-अलग थे, लेकिन घूम-फिर कर वे सब आख़िरकार एक ही मंज़िल पर पहुँच गए।

विस्तार

अक़्ल और जुनूँ—यानी दिमाग़ की समझदारी और दिल की दीवानगी—को हम हमेशा दो अलग और उलटे रास्ते मानते हैं। कोई इंसान ज़िंदगी में नाप-तोल कर सोच के साथ चलता है, तो कोई बस अपने दिल के जज़्बात के बहाव में बह निकलता है। लेकिन शायर मुस्कुराते हुए यह राज़ खोलता है कि चाहे आप सोचकर चलें या महज़ महसूस करके, ज़िंदगी के सारे मोड़ आख़िरकार एक ही हक़ीक़त और मंज़िल पर ले जाकर मिला देते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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