गुनाहगार के दिल से न बच के चल ज़ाहिद — जिगर मुरादाबादी

गुनाहगार के दिल से न बच के चल ज़ाहिद यहीं कहीं तिरी जन्नत भी पाई जाती है

“Do not turn away from the sinner's heart, O pious ascetic; / For somewhere right here, your paradise too is found.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

ऐ ज़ाहिद! गुनहगार के दिल से बचकर मत निकल, क्योंकि जिस जन्नत की तुझे तलाश है, वह शायद यहीं कहीं मिल जाए।

विस्तार

इस शेर में शायर ज़ाहिद यानी धर्म के नियमों में बंधे उपदेशक को समझाते हुए कहता है कि वह किसी गुनहगार के टूटे हुए दिल को हिक़ारत से न देखे। सच्ची आध्यात्मिकता और ख़ुदा की रहमत सिर्फ़ दिखावे की परहेज़गारी में नहीं, बल्कि एक शर्मिंदा और टूटे दिल की आजिज़ी में बसती है। जब इंसान दूसरों के दर्द और तौबा का एहतराम करता है, तो उसे असल जन्नत और सुकून वहीं मिल जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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