यक-ब-यक घबरा के जितनी दूर हट आता हूँ मैं — जिगर मुरादाबादी
“Startled all at once, the farther back I retreat, all the closer to me I find that playful beloved.”
अर्थ
अचानक घबराकर मैं जितना दूर हट जाता हूँ, उस चंचल महबूब को अपने और भी ज़्यादा क़रीब पाता हूँ।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस ख़ूबसूरत विरोधाभास को दर्शाता है जहाँ महबूब से दूर होना नामुमकिन हो जाता है। जब आशिक़ उसकी शोख़ी और जादू से घबराकर थोड़ा पीछे हटने की कोशिश करता है, तो पाता है कि महबूब उसके दिल और ख़यालों के और भी क़रीब आ गया है। यह भाव बताता है कि सच्ची मोहब्बत में आप जितनी दूरी बनाने की कोशिश करेंगे, उसका एहसास उतना ही गहरा और नज़दीक होता चला जाएगा।
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