हुस्न को क्या दुश्मनी है इश्क़ को क्या बैर है — जिगर मुरादाबादी
“What enmity does Beauty bear, what grudge does Love maintain? Stumbling over my very own feet, I am the cause of my own pain.”
अर्थ
हुस्न की मुझसे कोई दुश्मनी नहीं है और न ही इश्क़ से कोई बैर है, मैं तो ख़ुद अपने ही क़दमों से ठोकरें खा रहा हूँ।
विस्तार
अक्सर मोहब्बत में लोग अपनी तकलीफ़ों का इल्ज़ाम महबूब के हुस्न या इश्क़ की ज़ालिम फितरत पर लगा देते हैं, मगर शायर यहाँ बड़ी ईमानदारी से सच बयां कर रहा है। वह कहता है कि न तो हुस्न से कोई दुश्मनी है और न ही इश्क़ से कोई वैर—मेरी बर्बादी की वजह कोई दूसरा नहीं। अपने ही बनाए ख़यालों, उम्मीदों और ग़लतियों की वजह से मैं ख़ुद लड़खड़ा रहा हूँ और अपने ही क़दमों से ठोकरें खा रहा हूँ।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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