सलाम उस पे कि जिस ने उठा के पर्दा-ए-दिल मुझी में रह के मुझी में समा के लूट लिया

“Salutations to the one who, lifting the veil of the heart, dwelt within me, dissolved into me, and plundered my very soul.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

उस पर सलाम जिसने दिल का पर्दा उठाकर, मेरे ही अंदर रहकर और मुझ ही में समाकर मुझे लूट लिया।

विस्तार

यहाँ शायर अपने महबूब को एक अनोखे और मीठे अंदाज़ में सलाम पेश कर रहा है, जिसने दिल के परदे हटाकर अंदर क़दम रखा और फिर रूह में समाकर सब कुछ लूट लिया। इस शेर में लुट जाने का कोई गिला या शिकवा नहीं, बल्कि एक ख़ूबसूरत समर्पण है। यह उस इश्क़ की दास्तान है जहाँ आशिक़ अपने ही भीतर समाए महबूब की मौजूदगी में ख़ुद को पूरी तरह खोकर भी निहाल हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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