दिल कि जिस पर हैं नक़्श-ए-रंगा-रंग उस को सादा किताब होना था

“This heart, inscribed with prints of every vibrant hue, ought to have been a simple, unwritten book.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

यह दिल जिस पर कई तरह के रंग-बिरंगे नक़्श बने हुए हैं, इसे तो एक सादी और कोरी किताब होना चाहिए था।

विस्तार

शायर ने यहाँ दिल की तुलना एक ऐसी किताब से की है, जिस पर ज़िंदगी के तजुर्बों, इश्क़ और यादों के अनगिनत रंग-बिरंगे नक़्श छप चुके हैं। इस शेर में एक सादगी और सुकून की गहरी ख़्वाहिश छिपी है—काश यह दिल किसी कोरे पन्ने की तरह साफ़ और बेदाग़ रहता। यह उस थके हुए दिल की पुकार है जो दुनिया भर के एहसासों के बोझ से आज़ाद होकर सिर्फ़ ख़ामोशी चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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