ख़ुद्दारी-ओ-महरूमी महरूमी-ओ-ख़ुद्दारी अब दिल को ख़ुदा रक्खे अब दिल का ज़माना है

“Self-respect and deprivation, deprivation and self-respect; may God protect the heart now, for it is the heart's own time.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

आत्मसम्मान और वंचना एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं; अब ईश्वर ही दिल की हिफ़ाज़ت करे क्योंकि अब दिल का दौर आ गया है।

विस्तार

यह शेर ख़ुद्दारी और महरूमी यानी आत्मसम्मान और अभाव के उस अटूट रिश्ते को बयां करता है, जहाँ इंसान सर झुकाने से तो इनकार कर देता है मगर बदले में उसे खालीपन मिलता है। जब आप अपनी गरिमा से समझौता नहीं करते, तो तन्हाई और ख़्वाहिशों का टूटना तय है, और यही दर्द आपकी अना को और गहरा कर देता है। शायर बेचारे दिल के लिए हिफ़ाज़त की दुआ माँगता है, क्योंकि जब दिल अपने ही उसूलों की हुकूमत चलाने लगे, तो उसका इम्तिहान बहुत कड़ा हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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