“Begone, O counselor! What talk of profit, what of loss? Love has revealed to me the true harvest of love.”
ऐ नसीहत देने वाले, तू चला जा, यहाँ नफ़ा और नुक़सान की क्या बात! मुझे तो इश्क़ ने खुद ही समझा दिया है कि इश्क़ का असली हासिल क्या है।
इस शेर में आशिक उस नसीहत देने वाले (नासेह) को बेपरवाही से रुख़सत करता है, जो मोहब्बत को दुनियावी नफ़ा-नुकसान के तराज़ू में तौल रहा है। आम ज़िंदगी में हम फायदे और घाटे का हिसाब लगाते हैं, मगर इश्क़ का फलसफ़ा इस सांसारिक गणित से कोसों दूर है। शायर यह समझ चुका है कि इश्क़ में मिट जाना या दर्द सहना भी कोई घाटा नहीं, बल्कि प्यार का सच्चा एहसास और खुद को सौंप देना ही इसकी सबसे बड़ी नेमत है।
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