मुझे ये वहम रहा मुद्दतों कि जुरअत-ए-शौक़ कहीं न ख़ातिर-ए-मासूम पर गिराँ गुज़रे

“For years I lived with this anxious dread, lest the daring of my desire should weigh too heavily upon your innocent heart.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मुझे एक लंबे अरसे तक यह डर और वहम रहा कि मेरे प्यार और इज़हार की हिम्मत कहीं तुम्हारे मासूम दिल पर भारी न पड़ जाए और तुम्हें दुख न पहुँचाए।

विस्तार

इस शेर में प्यार का एक बेहद नाज़ुक और संजीदा पहलू दिखता है, जहाँ इज़हार से पहले महबूब के दिल की नज़ाकत का ख़्याल रखा गया है। शायर बरसों तक सिर्फ़ इसलिए ख़ामोश रहा कि कहीं उसकी दिली चाहत की बेबाकी ('जुरअत-ए-शौक़') सामने वाले के मासूम दिल पर कोई भारी बोझ न बन जाए। यह हिचकिचाहट कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि मोहब्बत का वह गहरा एहतराम है जिसमें अपनी भावनाएं थोपने के बजाय महबूब की मासूमियत और सुकून को महफ़ूज़ रखा जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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