“In drunken ecstasy, I tread love's boundless way; let the pull of my yearning sweep me wherever it may.”
मैं इश्क़ के रास्ते को बेख़ुदी और मस्ती के आलम में तय कर रहा हूँ; अब मेरे इश्क़ और चाहत की कशिश मुझे जिधर भी ले जाए।
इस शेर में आशिक़ प्यार के रास्ते पर किसी सोच-विचार या डर के बिना, एक मदमस्त मुसाफ़िर की तरह चल पड़ा है। उसने अपनी मंज़िल की फ़िक्र छोड़ दी है और पूरा सफ़र अपनी दिली तड़प यानी 'जज़्ब-ए-शौक़' के हवाले कर दिया है। यह उस बेख़ुदी और मुकम्मल समर्पण का खूबसूरत मंज़र है, जहाँ दिल की सच्ची कशिश ही इंसान को सही दिशा में खींच ले जाती है।
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