मस्ताना कर रहा हूँ रह-ए-आशिक़ी को तय ले जाए जज़्ब-ए-शौक़ मिरा अब जिधर मुझे

“In drunken ecstasy, I tread love's boundless way; let the pull of my yearning sweep me wherever it may.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मैं इश्क़ के रास्ते को बेख़ुदी और मस्ती के आलम में तय कर रहा हूँ; अब मेरे इश्क़ और चाहत की कशिश मुझे जिधर भी ले जाए।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ प्यार के रास्ते पर किसी सोच-विचार या डर के बिना, एक मदमस्त मुसाफ़िर की तरह चल पड़ा है। उसने अपनी मंज़िल की फ़िक्र छोड़ दी है और पूरा सफ़र अपनी दिली तड़प यानी 'जज़्ब-ए-शौक़' के हवाले कर दिया है। यह उस बेख़ुदी और मुकम्मल समर्पण का खूबसूरत मंज़र है, जहाँ दिल की सच्ची कशिश ही इंसान को सही दिशा में खींच ले जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.