डाला है बे-ख़ुदी ने अजब राह पर मुझे आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे

“Self-oblivion has cast me upon so strange a way: eyes I possess, yet nothing meets my sight.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

बेख़ुदी ने मुझे एक अनोखी राह पर डाल दिया है; मेरे पास आँखें तो हैं, लेकिन मुझे कुछ भी दिखाई नहीं देता।

विस्तार

यहाँ शायर 'बे-ख़ुदी' यानी अपने होश-ओ-हवास खो देने की उस अनोखी कैफ़ियत की बात कर रहे हैं, जो इश्क़ या रूहानी ख़्वाब में पैदा होती है। उनके पास आँखें तो हैं, लेकिन दुनिया की कोई भी चीज़ उन्हें दिखाई नहीं दे रही—मानो उनका सारा ध्यान सिर्फ़ अपने महबूब या अपने अंतर्मन में समा गया हो। यह बाहरी दुनिया से कटकर पूरी तरह किसी के ध्यान में खो जाने की एक बेहद ख़ूबसूरत और गहरी तस्वीर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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