अपने फ़रोग़-ए-हुस्न की दिखला के वुसअ'तें मेरे हुदूद-ए-शौक़ बढ़ा कर चले गए

“Displaying the vast expanses of their beauty's radiant glow, / They stretched the horizons of my yearning, and turned away to go.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

वे अपने सौंदर्य की चमक का विस्तार दिखाकर मेरी चाहत और तलब के दायरों को बढ़ा गए और फिर चले गए।

विस्तार

इस शेर में बड़ी नज़ाकत से बताया गया है कि महबूब के दीदार ने आशिक़ के दिल पर क्या असर डाला। जब महबूब ने अपने हुस्न की बेपनाह चमक और उसकी अथाह गहराइयों की एक झलक दिखाई, तो आशिक़ के दिल में चाहत और तड़प का दायरा भी असीम हो गया। त्रासदी यह है कि वह इस दीवानगी को जगाकर खुद रुख़सत हो गया, और आशिक़ अब एक अंतहीन ख़्वाहिश के समंदर में तन्हा छूट गया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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