समझा के पस्तियाँ मिरे औज-ए-कमाल की अपनी बुलंदियाँ वो दिखा कर चले गए

“Revealing the shallow depths where my highest glory lay, they displayed their own towering heights and walked away.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

वे मेरे हुनर के चरम को तुच्छ या नीचा साबित करके और अपनी ऊँचाइयाँ दिखाकर चले गए।

विस्तार

यह शेर दिल को छू लेने वाली बेरुखी और अहंकार की गहरी चोट को बयां करता है। शायर जिसे अपनी कामयाबी या मोहब्बत की सबसे ऊँची चोटी (औज-ए-कमाल) समझ रहा था, सामने वाले ने एक ही पल में उसे बेहद मामूली और निचली सतह साबित कर दिया। दर्द इस बात का ज्यादा है कि वे अपनी बुलंदियों की नुमाइश करके बेपरवाही से आगे बढ़ गए, और शायर के हिस्से में सिर्फ अपनी हार और बिखरा हुआ गुरूर छोड़ गए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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