लब थरथरा के रह गए लेकिन वो ऐ 'जिगर' जाते हुए निगाह मिला कर चले गए

“Their lips merely trembled and fell still, yet O Jigar; as they departed, they locked their gaze with mine and walked away.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

उनके होंठ सिर्फ़ काँप कर रह गए और वे कुछ कह न सके, लेकिन ऐ 'जिगर', जाते हुए वे मुझसे नज़रें मिला कर चले गए।

विस्तार

जुदाई के इस नाज़ुक मोड़ पर जिगर मुरादाबादी ख़ामोशी की ख़ूबसूरत दास्तान बयां कर रहे हैं। महबूब के होंठ कांप कर रह गए, मानो दिल में बहुत कुछ कहने की तड़प थी मगर हिचक या मजबूरी ने रोक दिया। लेकिन जाते-जाते उनकी आँखों का एक बार नज़रें मिला लेना वो सब कुछ कह गया, जो लफ़्ज़ों की हदों से कहीं परे था।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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