કુદરતના ક્રમ સબ પલટાવો, દિલદાર! વૈશાખી દાવાનલ! આવો, દિલદાર!

“Overturn every law of nature, O beloved! O Vaishakhi inferno! Come, O beloved!”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

हे प्रिय! प्रकृति के सभी नियम उलट दो। हे वैशाख की दावाग्नि! आओ, हे प्रिय!

विस्तार

यह दोहा एक प्रेमी की अपने प्रियतम से तीव्र पुकार है। वे प्रिय से कह रहे हैं कि वे आकर प्रकृति के सारे नियम बदल दें, पूरे ब्रह्मांड की व्यवस्था को उलट दें। दूसरी पंक्ति इस इच्छा को और भी गहरा करती है, जहाँ प्रियतम के आने की तुलना 'वैशाखी दावानल' से की गई है। वैशाख गर्मियों का महीना होता है और इस दौरान लगी जंगल की आग बहुत भयंकर और सब कुछ जलाकर राख करने वाली होती है। इसलिए, प्रेमी सिर्फ प्रिय से आने के लिए नहीं कह रहा, बल्कि ऐसी प्रचंड, परिवर्तनकारी और तीव्र उपस्थिति के साथ आने को कह रहा है जो अपने रास्ते में सब कुछ बदल दे, ठीक एक शक्तिशाली ग्रीष्मकालीन आग की तरह। यह एक ऐसे प्रेम का आह्वान है जो इतना प्रबल है कि वह वास्तविकता को ही बदल दे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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