“Let that last nectar be absorbed, O Beloved!Sow poison-vines in every heart, O Beloved!”
हे प्रिय! उस अंतिम अमृत को सोख लिया जाए, और हर दिल में विष की बेलें बोई जाएँ।
यह दोहा एक प्रेमी की गहरी भावनात्मक पुकार है। पहले यह गुज़ारिश करता है कि किसी मीठे और अनमोल अनुभव की हर आख़िरी बूंद को पूरी तरह सोख लिया जाए, जैसे अमृत का अंतिम घूँट। फिर, एक सशक्त और लगभग विरोधाभासी मोड़ पर, यह महबूब से कहता है कि वह हर दिल में 'ज़हरीली बेलें' बो दे। यह शाब्दिक द्वेष नहीं है, बल्कि एक प्रचंड भावना की गहन अभिव्यक्ति है। यह एक ऐसे प्रेम को उजागर करता है जो इतना तीव्र है कि वह दर्द की सीमा तक पहुँच जाए, या ऐसा तीखा दिल का दर्द कि कहने वाला चाहता है कि हर कोई ऐसी शक्तिशाली, सर्वव्यापी भावनाओं का अनुभव करे, भले ही वे जटिल या कड़वी-मीठी क्यों न हों, बजाय केवल उदासीनता के। यह सच्चे प्रेम के चरम उतार-चढ़ाव की बात करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
