ખુલ્લે પગ માનવી મદાંધ બની ચાલે; ધખતે મધ્યાહન મોજ વગડાની મ્હાલે:

“Barefoot, man, blind with arrogance, strides;In the scorching noon, he revels in wild joys.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

नंगे पैर इंसान अभिमान में अंधा होकर चलता है। धधकती दोपहर में भी वह जंगल के बेपरवाह आनंद में लीन रहता है।

विस्तार

यह दोहा उस व्यक्ति का चित्रण करता है जो अहंकार से अंधा होकर, तपती दोपहरी में नंगे पाँव चलता है। जंगल की कठोर परिस्थितियों के बावजूद, वह इसमें एक अजीब आनंद पाता है। यह खूबसूरती से दर्शाता है कि कैसे गहरा अभिमान किसी व्यक्ति को असुविधा के प्रति अनजान बना सकता है या कठिन परिस्थितियों में भी खुशी दिला सकता है। ऐसा लगता है जैसे उनका अहंकार उन्हें कठिनाई को एक अनोखे आनंद के स्रोत के रूप में स्वीकार करने पर मजबूर करता है, या शायद वे अपने आत्म-महत्व में इतने लीन हैं कि उन्हें गर्मी महसूस भी नहीं होती। यह हमारे अहंकार के हमारी वास्तविकता को आकार देने और हमें उन चुनौतियों से अनजान बनाने के तरीके पर एक शक्तिशाली प्रतिबिंब है जिनका हम सामना करते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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