“At that time, only unworthy sons will mock you, Mother!Humiliated, trodden underfoot you may be: yet a Mother is a Mother!”
उस समय, केवल कपूत बेटे ही तुम्हारा उपहास करेंगे, माँ! तुम अपमानित और कुचली हुई क्यों न हो, फिर भी माँ, माँ ही होती है।
यह दोहा माँ के निस्वार्थ प्रेम और उसकी पहचान की बात करता है। यह कहता है कि यदि कोई माँ मुश्किल में है या किसी भी तरह से अपमानित हुई है, तो ऐसे समय में केवल बुरे बच्चे ही उसका मज़ाक उड़ा सकते हैं। लेकिन कविता एक गहरी सच्चाई पर जोर देती है: 'फिर भी, माँ तो माँ ही है!' इसका मतलब है कि माँ का प्रेम, उसका महत्व और उसका सार कभी नहीं बदलता, चाहे वो कितनी भी मुश्किलों का सामना कर रही हो या दूसरों द्वारा उसके साथ कैसा भी व्यवहार किया जाए। यह मातृत्व के पवित्र और शाश्वत स्वरूप को दर्शाता है।
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