નદીયું નવજોબન ભાન ભૂલે, નવ દીન કપોતની પાંખ ખૂલે. મધરા મધરા મલકાઈને મેડક મેહસું નેહસું બાત કરે.

“Rivers in their fresh youth forget their way,New wings of pigeons unfurl for the day.With gentle smiles, the frogs to the rain speak,With love and affection, their soft words they seek.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

नदियाँ अपने नए यौवन में अपना रास्ता भूल जाती हैं, और कबूतरों के नए पंख दिन के लिए खुलते हैं। मेंढक धीरे-धीरे मुस्कुराते हुए बारिश से प्रेम और स्नेह के साथ बात करते हैं।

विस्तार

यह दोहा मानसून के आगमन का एक सुंदर चित्रण प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि कैसे नदियाँ, नई ऊर्जा और जीवन से भरपूर होकर, अपनी सीमाएँ भूल जाती हैं और खुशी से उमड़ पड़ती हैं। यह नए दिनों में कबूतरों के पंख खुलने की बात भी करता है, जो नई शुरुआत और मौसम में बदलाव के साथ आने वाली जीवंत गतिविधि का प्रतीक है। और फिर, धीमी, मधुर मुस्कान के साथ, मेंढक प्यार से बारिश से बातें करते हुए दिखाई देते हैं। यह उस मनमोहक और सजीव वातावरण को खूबसूरती से दर्शाता है जब प्रकृति जीवनदायिनी वर्षा का आलिंगन करती है, जिससे हर जीव में खुशी छा जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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