ઠપકો દેતી હસતી મૂરતી એ ઝળહળતી ચાલી જાય, સ્વપ્ન સરે મ્હારે કાન પડે મ્હારા દેશની ઊંડેરી હાય રે

“The radiant figure, smiling, chiding, drifts away,As dreams depart, I hear my country's deep, deep sigh.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

वह तेजोमय, मुस्कुराती हुई और फटकारती हुई मूर्ति दूर चली जाती है। जैसे ही सपने बिखरते हैं, मुझे अपने देश की गहरी आह सुनाई देती है।

विस्तार

यह दोहा एक टूटते हुए सपने का मार्मिक चित्रण करता है। कवि देखता है कि एक चमकती, मुस्कुराती हुई आकृति, हल्की सी डांट के साथ, धीरे-धीरे दूर जा रही है। जैसे ही यह सुंदर और प्रकाशमान दृश्य ओझल होता है, सपना टूट जाता है। फिर कवि के कानों में अपने देश की गहरी, दुख भरी आहट गूँजने लगती है। यह एक आशा भरे और कभी-कभी थोड़े आलोचनात्मक सपने से जागकर अपने राष्ट्र के गहरे दर्द और पीड़ा की कठोर वास्तविकता में लौटने का एक भावनात्मक क्षण है। सपने का सुखद अनुभव देश के भारी दुख की जागती हुई उदासी में बदल जाता है।

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पाठ
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