રડી કો હશે આંખ રાતી. એવી કોઈ પ્રિયાનો પ્રીતમ આજ ચિતા પર પોઢે,

“Whose eyes, red with weeping, could these be? The beloved of such a dear one today sleeps on the pyre.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

यह किसकी आँखें हैं जो रोने से लाल हो गई हैं? आज ऐसी ही किसी प्रियतमा का प्रेमी चिता पर सो रहा है।

विस्तार

यह दोहा प्रेम और वियोग की गहरी भावना को व्यक्त करता है। इसमें बताया गया है कि किसी की आँखें रो-रोकर लाल हो गई हैं, जो गहरे दुःख का प्रतीक है। इस दुःख का कारण यह है कि उस प्रेमिका का प्रियतम, उसका जीवनसाथी, आज चिता पर लेटा हुआ है। यह पंक्ति प्रेम के खो जाने और मृत्यु की अंतिम सत्यता को बड़ी मार्मिकता से दर्शाती है, जिससे प्रियजन को खोने का दर्द महसूस होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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पाठ
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