ધનિકો મ્હાલંત મુક્ત, ગરીબોનાં લાલ રક્ત સત્તાના ભક્ત આજ શોષે કરભારે.

“The wealthy revel freely, while the poor shed red blood;Today, the devotees of power exploit them with heavy tax burdens.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

धनी मुक्त होकर मौज करते हैं, जबकि गरीब अपना लाल रक्त बहाते हैं; आज सत्ता के भक्त भारी करों के बोझ से उनका शोषण करते हैं।

विस्तार

यह दोहा समाज की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। यह बताता है कि कैसे धनी लोग बिना किसी चिंता के आज़ादी और ऐशो-आराम से अपना जीवन बिताते हैं। वहीं, गरीबों के 'लाल रक्त' का ज़िक्र किया गया है, जो उनकी कड़ी मेहनत, संघर्षों और जीवन के सार का प्रतीक है। यह कविता सशक्त रूप से कहती है कि सत्ता के उपासक, यानी जो लोग शक्ति और अधिकार में हैं, वे इन कमज़ोर लोगों का शोषण करते हैं। वे ऐसा भारी करों और बोझों के माध्यम से करते हैं, जिससे गरीबों की गाढ़ी कमाई और मेहनत को निचोड़ा जाता है, जबकि अमीर बेफिक्र रहते हैं। यह सामाजिक असमानता और सत्ता के दुरुपयोग पर एक मार्मिक टिप्पणी है।

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