નયને નીર ઝરે. -દીવડો. 'સાંજ પડ્યે આવું છું, સજની!'

“Tears from eyes do stream, the lamp's light low does gleam. 'At fall of evening, love, I'll join your dream!'”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

आँखों से आँसू बह रहे हैं, और दीपक की रोशनी मंद है। वक्ता कहता है, 'मैं शाम होने पर आ रहा हूँ, हे सखि!'

विस्तार

यह दोहा गहरी भावनाओं और प्रतीक्षा के एक पल को खूबसूरती से दर्शाता है। 'नयने नीर झरे' यानी आँखों से आँसू बह रहे हैं, यह किसी प्रियजन की प्रतीक्षा में विरह या उदासी का चित्रण करता है। 'दीवड़ो' यानी दीपक, यहाँ समय के बीतने या अंधकार में आशा की किरण का प्रतीक हो सकता है। फिर एक सुकून देने वाला वादा आता है: 'सांझ पड्ये आवूं छू, सजनी!' जिसका अर्थ है, 'शाम होते ही मैं आऊँगा, प्रिय!' यह आश्वासन देता है कि मिलन का क्षण निकट है, जो जुदाई या दुःख के बाद आशा और सांत्वना लाता है। यह धैर्य और प्रियजन के लौट आने की प्रतिज्ञा का एक मार्मिक चित्रण है, जैसे दिन ढलकर रात में बदलता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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