પલ પલ પડઘા પડે; સકળ નગર સૂતું છે, સ્વામી!

“Echoes fall, moment by moment; The whole city sleeps, O my Lord!”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

पल पल प्रतिध्वनियाँ पड़ रही हैं; सम्पूर्ण नगर सोया हुआ है, हे स्वामी!

विस्तार

यह दोहा एक मार्मिक दृश्य प्रस्तुत करता है: 'पल पल पड़घा पड़े; सकल नगर सूतू छे, स्वामी!' कल्पना कीजिए कि हर पल एक निरंतर, मधुर ध्वनि या प्रतिध्वनि गूँज रही है – शायद सत्य की फुसफुसाहट, समय का गुज़रना, या ईश्वर का आह्वान। फिर भी, इस शाश्वत गतिविधि के बीच, पूरा संसार, जो सोए हुए शहर द्वारा दर्शाया गया है, अनभिज्ञ या उदासीन रहता है। यह एक गहरा अवलोकन है, एक कोमल विलाप है, जो बताता है कि जब महत्वपूर्ण घटनाएँ लगातार घटित हो रही होती हैं, तब भी मानव अक्सर उन्हें चूक जाता है, अपनी नींद या सांसारिक कार्यों में लीन रहता है। यह जाग्रति का आह्वान है, जीवन की सूक्ष्म फिर भी महत्वपूर्ण प्रतिध्वनियों के प्रति उपस्थित और चौकस रहने की याद दिलाता है।

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પલ પલ પડઘા પડે; | Sukhan AI