ज़मीर-ए-लाला मय-ए-लाल से हुआ लबरेज़
इशारा पाते ही सूफ़ी ने तोड़ दी परहेज़
“The heart of the Nectar of the Lily, intoxicated by the Wine of the Beloved, As soon as a signal was given, the Sufi broke his restraint.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
लाला का ज़मीर, लाल के मय से मदहोश हुआ, और इशारा मिलते ही सूफ़ी ने अपना संयम तोड़ दिया।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस पल को बयां करता है जब होश और नशा एक हो जाते हैं। 'लाला का ज़मीर' (conscience) 'लाल के मय' (wine of love) से मदहोश हो जाता है, मतलब कि तर्क और भावना का भेद मिट जाता है। सूफ़ी ने जैसे ही इशारा पाया, उन्होंने अपनी सारी परहेज़ तोड़ दी। यह दिखाता है कि जब प्यार की रूहानी गहराई को एहसास होता है, तो इंसान खुद को रोक नहीं पाता।
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