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कभी जो आवारा-ए-जुनूँ थे वो बस्तियों में फिर बसेंगे बरहना-पाई वही रहेगी मगर नया ख़ार-ज़ार होगा

Those who were once wanderers of madness will settle in the settlements, The bare-foot woman will remain, but the new market will arise.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

कभी जो पागलपन के आवारा थे, वे बस्तियों में बस जाएंगे। नंगी महिला वही रहेगी, पर एक नया बाज़ार बनेगा।

विस्तार

यह शेर हमें जीवन के दो विपरीत पहलुओं को दिखाता है। शायर कहते हैं कि जो लोग कभी पूरी आज़ादी और जुनून में जी रहे थे, वे भी एक दिन समाज की बस्तियों में बस जाएँगे। लेकिन, शायर एक गहरी बात कहते हैं... कि भले ही उनका ठिकाना बदल जाए, उनका अंदरूनी दर्द, उनका नंगापन, वो वैसा ही रहेगा। यह ज़िंदगी के उस सच को बयां करता है जो कभी नहीं बदलता।

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