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मैं ज़ुल्मत-ए-शब में ले के निकलूँगा अपने दरमाँदा कारवाँ को शह निशाँ होगी आह मेरी नफ़स मिरा शो'ला बार होगा

In the darkness of the night, I will take out my caravan of memories; My sigh will be the sign, and my breath will be the flame.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मैं रात के अँधेरे में अपने यादों के कारवाँ को लेकर निकलूँगा; आह मेरा संकेत होगी और मेरी साँस लौ होगी।

विस्तार

यह शेर जीवन की किसी बड़ी, मुश्किल यात्रा को बयां करता है। 'थका हुआ कारवाँ' शायर की आत्मा है, जो 'रात के अंधेरे' में निकल रही है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि जब इंसान अपनी चरम सीमा पर हो, जब वह थका हुआ हो, तब भी वह अपनी पहचान छोड़ जाता है। वह पहचान कोई निशान नहीं, बल्कि दिल की आवाज़—आह, और रूह की लपट (शो'ला) होती है। यह जीने की ज़िद है!

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