ये रस्म-ए-बरहम फ़ना है ऐ दिल गुनाह है जुम्बिश-ए-नज़र भी रहेगी क्या आबरू हमारी जो तू यहाँ बे-क़रार होगा

“This ritual of cruelty is ephemeral, O heart, even the slightest glance is a sin. Will our honor remain, when you are restless here?”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यह क्रूर रस्म क्षणभंगुर है, हे दिल, यहाँ तक कि नज़र की हल्की-सी हरकत भी गुनाह है। जब तुम यहाँ बेचैन होगे, तो हमारी इज़्ज़त क्या रहेगी।

विस्तार

यह शेर उस दर्दनाक उलझन को बयां करता है जो इश्क़ में होती है। शायर कहते हैं कि बिछड़ने का ये नाटक, ये रस्म, बस एक धोखा है। दिल को चेतावनी दे रहे हैं कि तेरी एक नज़रों की हरकत भी गुनाह है। असली सवाल ये है कि जब तू इतना बेक़रार होगा, तो हमारी आबरू, हमारा मान-सम्मान, क्या बचेगा?

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