ख़ुदा के आशिक़ तो हैं हज़ारों बनों में फिरते हैं मारे मारे
मैं उस का बंदा बनूँगा जिस को ख़ुदा के बंदों से प्यार होगा
“Thousands are lovers of God, wandering in various forms, suffering and struggling, I shall become the servant of one who will love the servants of God.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
ख़ुदा के आशिक़ तो हैं हज़ारों बनों में फिरते हैं मारे मारे। मैं उस का बंदा बनूँगा जिस को ख़ुदा के बंदों से प्यार होगा।
विस्तार
यह शेर असल इबादत और सच्चे इश्क़ की बात करता है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि ख़ुदा के आशिक़ तो बहुत हैं.... लेकिन शायर एक बहुत ज़रूरी बात कहते हैं। वो कहते हैं कि मैं सिर्फ़ उस इंसान का बंदा बनूँगा, जिसे ख़ुदा के बंदों से सच्चा प्यार हो। यह सिर्फ़ आस्था नहीं, यह एक जीवन दर्शन है जो हमें इंसानियत से जोड़ता है।
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