खिल जाएँ क्या मज़े हैं तमन्ना-ए-शौक़ में
दो चार दिन जो मेरी तमन्ना करे कोई
“What pleasure is there in the yearning for desire, If someone only desires me for a couple of days?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
क्या मज़ा है मेरे शौक़ की तमन्ना में, अगर कोई सिर्फ दो-चार दिन के लिए मुझे याद करे।
विस्तार
यह शेर जुनून और चाहत के उस नशीले एहसास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि शौक़ की तमन्ना में जो मज़ा है, वह इतना गहरा है कि बस दो-चार दिन की चाहत ही दिल को खिला देने के लिए काफी है। यह इक़बाल साहब ने प्रेम की उस क्षणभंगुर, पर बेहद तीव्र भावना को पकड़ा है, जब जुनून हमें पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लेता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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