नहीं फ़क़्र ओ सल्तनत में कोई इम्तियाज़ ऐसा
ये सिपह की तेग़-बाज़ी वो निगह की तेग़-बाज़ी
“There is no distinction in poverty or royalty, It is the sword-play of the soldier, the sword-play of the gaze.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
फ़क़्र और सल्तनत में कोई भेद नहीं है; यह सिपाही की तलवारबाज़ी है और निगाह की तलवारबाज़ी।
विस्तार
यह शेर हमें सिखाता है कि असली शान या कोई भी बड़ा दर्जा, न तो दौलत में है, न ही सल्तनत में। शायर कहते हैं कि सबसे बड़ी जंग, सबसे बड़ा इम्तियाज़, तलवार से नहीं, बल्कि आँखों के इशारों और दिल के जज़्बात से होती है। यह प्रेम की शक्ति को दुनियावी सत्ता से कहीं ज़्यादा ऊँचा स्थापित करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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