“The heart is pierced by the spring of foreign beauty, Passing through the pearl and the jewel of the high, dark dome.”
भले ही विदेशी सौंदर्य की बहार दिल को भेदती है, फिर भी ऊंचे, गहरे गुंबद के मोती और रत्न से गुज़र जाना है।
यह शेर अल्लामा इकबाल साहब की एक गहरी सोच है। शायर यहाँ कहते हैं कि बेशक, बाहर की दुनिया में बहुत मोहक और दिल को लुभाने वाली सुंदरता तो है। पर.... असली चुनौती, असली राह तो उस ऊंचे, बड़े से रास्ते पर है। और उस रास्ते से गुज़रना है, सिर्फ़ 'दाना और दाम'—यानी सांसारिक संघर्षों और ज़िम्मेदारियों से! यह शेर हमें सिखाता है कि दुनिया की सुंदरता के पीछे, जीवन का असली संघर्ष कितना गहरा होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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