जिस का अमल है बे-ग़रज़ उस की जज़ा कुछ और है हूर ओ ख़ियाम से गुज़र बादा-ओ-जाम से गुज़र

“Whose deeds are without purpose, their reward is something else, Passing through the celestial maidens and the tent, through wine and cup.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

जिस व्यक्ति का कर्म बिना किसी उद्देश्य के होता है, उसका प्रतिफल कुछ और होता है; हूरों और तम्बू से गुज़रते हुए, शराब और प्याले से गुज़रते हुए।

विस्तार

यह शेर हमें कर्म और इरादे की गहराई समझाता है। शायर कह रहे हैं कि जिस काम को आप किसी फल की उम्मीद के बिना, बस निस्वार्थ भाव से करेंगे, उसका प्रतिफल दुनियावी नहीं होगा। यह एक आध्यात्मिक यात्रा है। हूर और ख़याम से गुज़रना, शराब और जाम से गुज़रना... यह ज़िंदगी के मोह-माया भरे पड़ाव हैं। असली बात तो इस निस्वार्थ कर्म में है, जहाँ परिणाम की चिंता ही नहीं होती।

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