रहा न हल्क़ा-ए-सूफ़ी में सोज़-ए-मुश्ताक़ी
फ़साना-हा-ए-करामात रह गए बाक़ी
“In the Sufi gathering, the burning passion remains unfulfilled, only tales of miracles are left behind.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
सूफी महफ़िल में विरह की आग बाकी नहीं रही, बस चमत्कार की कहानियाँ बची हैं।
विस्तार
यह शेर अल्लामा इकबाल साहब की गहन सोच को बयां करता है। शायर कहते हैं कि सच्चा, जलता हुआ इश्क़ या जुनून (सोज़-ए-मुश्ताक़ी) न तो किसी सूफी महफ़िल में मिलता है.... और न ही वह किसी दायरे में सिमट जाता है। जो चीज़ें बची हैं, वे बस करिश्मों की कहानियाँ हैं। यह एक इशारा है कि हमें अनुभव पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल किस्सों पर।
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