पूछ उस से कि मक़्बूल है फ़ितरत की गवाही — अल्लामा इक़बाल
“Ask him if the nature testifies to what is accepted, Or if you are the master of the destination, or the lost traveler.”
अर्थ
उससे पूछ कि क्या प्रकृति की गवाही स्वीकार्य है, या तुम मंज़िल के मालिक हो या भटका हुआ मुसाफ़िर।
विस्तार
यह शेर हमें एक बहुत गहरा सवाल पूछने को कहता है। शायर पूछ रहे हैं कि जिस शख्स पर हम भरोसा करते हैं, क्या वह सचमुच अपनी मंज़िल का मालिक है? या वह सिर्फ़ भटक रहा है, जिसे पता ही नहीं कि उसे कहाँ जाना है। यह सिर्फ़ किसी और के बारे में नहीं है, बल्कि यह हमें खुद से पूछने को कहता है कि क्या हम अपनी ज़िंदगी में सही राह पर हैं या सिर्फ़ भटक रहे हैं। यह एक आत्म-मंथन है!
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