मन की दुनिया में न पाया मैं ने अफ़रंगी का राज
मन की दुनिया में न देखे मैं ने शैख़ ओ बरहमन
“In the world of the mind, I found not the rule of the foreigner, Nor did I see the Sheikh or the Brahmin.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मन की दुनिया में मुझे अफ़रंगी का शासन नहीं मिला, और न ही मैंने शैख़ या ब्राह्मण को देखा।
विस्तार
इस शेर में शायर एक बहुत गहरा विचार प्रस्तुत कर रहे हैं। वो कहते हैं कि मन की दुनिया, यानी दिल का अहसास, किसी बाहरी शासन या धर्म के नियम से बंधा नहीं है। चाहे वो अफ़रांगी का राज हो, या शैख़ और ब्राह्मण की उपस्थिति—मन की अपनी एक अलग ही दुनिया होती है। यह शेर इंसान की भावनाओं की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
