पानी पानी कर गई मुझ को क़लंदर की ये बात
तू झुका जब ग़ैर के आगे न मन तेरा न तन
“The words of Qalandar have made me weep, my heart, When you bowed before another, neither mind nor body were yours.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
कलंदर की ये बात सुनकर मैं पानी-पानी हो गया; जब तुम किसी और के सामने झुकी, तो न तुम्हारा मन था न तुम्हारा तन।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी बात कहता है.... यह उस दर्द को बयां करता है जब हम देखते हैं कि हमारा महबूब अपनी वफ़ादारी और सिद्धांतों से समझौता कर रहा है। शायर कहते हैं कि किसी की बातों ने उन्हें इतना बेचैन कर दिया है, कि वे आपकी उस कमज़ोरी पर तंज कसते हैं—कि आप ग़ैर के सामने अपने मन और तन दोनों को झुका लेते हैं।
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