मन की दौलत हाथ आती है तो फिर जाती नहीं
तन की दौलत छाँव है आता है धन जाता है धन
“When the wealth of the mind arrives, it never leaves, But the wealth of the body is merely shade; when wealth comes, wealth leaves.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मन की दौलत हाथ आने पर कभी जाती नहीं, जबकि तन की दौलत मात्र छाँव है; जब धन आता है, तो वह चला जाता है।
विस्तार
ये शेर बहुत गहरा फ़र्क़ समझाता है.... शायर कहते हैं कि यह दुनिया की दौलत, तन की दौलत... ये सब छाँव की तरह हैं, आती हैं और चली जाती हैं। लेकिन, मन की दौलत, मतलब आपका ज्ञान, आपकी समझ... वो एक ऐसी दौलत है जो एक बार हाथ लग गई, तो कभी जाती नहीं। यह बताता है कि असली पूंजी तो हमारे भीतर है।
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