मन की दुनिया मन की दुनिया सोज़ ओ मस्ती जज़्ब ओ शौक़ तन की दुनिया तन की दुनिया सूद ओ सौदा मक्र ओ फ़न

“The world of the mind, the world of the mind, with burning passion, deep feeling and desire; The world of the body, the world of the body, with worldly gain, deceit, and art.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मन की दुनिया में सोज़ और मस्ती, जज़्ब और शौक़ होता है; और तन की दुनिया में सूद और सौदा, मक्र और फ़न होता है।

विस्तार

यह शेर अल्लामा इकबाल का एक गहरा तफ़र्क़ (contrast) है। शायर ने दो दुनियाओं का ज़िक्र किया है—एक है दिल की दुनिया, जो इश्क़, मस्ती और सच्चे जज़्बात से भरी है। दूसरी है जिस्म की दुनिया, जो सौदा, लेन-देन और नक़ली फ़न से भरी है। इकबाल साहब कहते हैं कि जीवन का सच्चा मक़ाम दिल में होता है, जो सिर्फ़ भावनाओं से जीता है, न कि महज़ चीज़ों के लेन-देन से।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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