आज़र का पेशा ख़ारा-तराशी — अल्लामा इक़बाल
“The profession of Azar is carving/sculpting, The work of the Khwālīl is carving/sculpting.”
अर्थ
आज़र का पेशा ख़ारा-तराशी है, और ख़लीलाँ का काम ख़ारा-गुदाज़ी है।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है। शायर यहाँ एक बात कह रहे हैं कि दुनिया में हर काम का एक नज़ारा होता है—जैसे तराशी का हुनर, जो दिखता है। लेकिन दोस्तों का साथ.... ये हुनर से कहीं ज़्यादा है! दोस्तों का साथ तो एक मवेशी को चराने जैसा है.... जिसमें न सिर्फ़ देखभाल होती है, बल्कि एक सुरक्षा का एहसास भी होता है। Allama Iqbal कहते हैं कि सच्चा साथ हमेशा ऐसे ही होता है—शांत, पर बेहद मज़बूत।
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