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सई-ए-पैहम है तराज़ू-कम-ओ-कैफ़-ए-हयात
तेरी मीज़ाँ है शुमार-ए-सहर-ओ-शाम अभी

O beloved, the scale of your wisdom and the measure of life, Your balance is yet to count the dawns and the nights.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हे प्रिय, बुद्धि का तराजू और जीवन का माप, तुम्हारा संतुलन अभी सुबह और शाम गिनने को है।

विस्तार

यह शेर हमें रिश्ते की एक कड़वी सच्चाई से रूबरू कराता है। शायर कहते हैं कि महबूब के पास एक तराज़ू है, जो ज़िंदगी के हर सुख-दुख को तौलता है। और आप? आपकी असल क़ीमत, आपकी मीज़ाँ, अभी भी सुबह और शाम के गुज़रते वक़्त के हिसाब से तौली जा रही है। यह वक़्त के साथ होने वाले मूल्यांकन और बेचैनी को बयान करता है।

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