उज़्र-ए-परहेज़ पे कहता है बिगड़ कर साक़ी है तिरे दिल में वही काविश-ए-अंजाम अभी

“On the excuse of restraint, the cupbearer says, 'He is the very poet of the end in your heart.'”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

संयम के बहाने, साक़ी कहता है कि तुम्हारे दिल में अभी भी वही अंत का कवि है।

विस्तार

यह शेर मोहब्बत की उस गहरी उलझन को बयान करता है, जहाँ वादे टूट जाते हैं, लेकिन चाहत नहीं टूटती। शायर कहते हैं कि भले ही मैंने कोई वादा तोड़ा हो, पर मेरी नज़र में, तुम्हारे दिल में वो आग अभी भी बाकी है। वो चाहत... वो इंतज़ार... जो तुम्हें मंज़िल तक ले जाएगा। क्या वादे से ज़्यादा मज़बूत कुछ है?

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