शेवा-ए-इश्क़ है आज़ादी ओ दहर-आशेबी
तू है ज़ुन्नारी-ए-बुत-ख़ाना-ए-अय्याम अभी
“The veil of love is freedom and the night of the age, You are the source of the idol-house of the ages now.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
प्रेम का परदा आज़ादी है और युग की रात है, तुम अभी युगों के मूर्ति-घर का स्रोत हो।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के नशे और आज़ादी के रिश्ते को समझाता है। शायर कहते हैं कि इश्क़ की मस्ती ही आज़ादी है, और समय का गुज़रना भी एक तरह का नशा है। लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप (माशूक़/आदर्श) ही युगों-युगों के मंदिरों के स्तंभ हैं। आप ही वो मज़बूत बुनियाद हैं!
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